दानापुर रेलवे स्टेशन के आसपास बना सूखे नशे का अड्डा खंडहरों में पल रहा नशे का कारोबार, पुलिस की कार्यशैली पर उठा सवाल

“नशा शराब में होती तो नाचती बोतल…” — यह गाना भले ही लोगों ने मजाक में सुना हो, लेकिन बिहार में शराबबंदी के बीच अब सूखे नशे का जाल तेजी से फैलता नजर आ रहा है।

दानापुर रेलवे स्टेशन के आसपास बना सूखे नशे का अड्डा खंडहरों में पल रहा नशे का कारोबार, पुलिस की कार्यशैली पर उठा सवाल
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“नशा शराब में होती तो नाचती बोतल…” — यह गाना भले ही लोगों ने मजाक में सुना हो, लेकिन बिहार में शराबबंदी के बीच अब सूखे नशे का जाल तेजी से फैलता नजर आ रहा है।

शराब बंदी के बावजूद जहां अवैध शराब की होम डिलीवरी की चर्चाएं आम हैं, वहीं महंगी शराब खरीदने में असमर्थ कई लोग अब सूखे नशे की गिरफ्त में पहुंच रहे हैं।ताजा मामला दानापुर रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर-1ए के बाहर का है, जहां पुराने जीआरपी बैरक के आसपास का इलाका इन दिनों नशेड़ियों का अड्डा बनता जा रहा है।

 स्थानीय लोगों के अनुसार यहां दिन-रात संदिग्ध युवकों का जमावड़ा लगा रहता है और खुलेआम नशा किया जाता है।स्थानीय लोगों का कहना है कि रेलवे के कई खंडहरनुमा भवन, खाली पड़े क्वार्टर और सुनसान इलाके अब नशेड़ियों एवं चोरों के सुरक्षित ठिकाने बन चुके हैं।

हैरानी की बात यह है कि इतने गंभीर हालात के बावजूद पुलिस की नजर अब तक इन ठिकानों पर प्रभावी तरीके से नहीं पहुंच पाई है।

बीते दिनों खगौल थाना क्षेत्र के एक खंडहरनुमा रेलवे क्वार्टर से एक व्यक्ति का शव मिलने के बाद इलाके में सनसनी फैल गई थी। घटनास्थल से नशे का इंजेक्शन और पुड़िया भी बरामद हुई थी।

उस समय भी स्थानीय लोगों ने पुलिस को सूचना देकर रेलवे कॉलोनियों और खंडहर पड़े भवनों में चल रहे नशे के खेल पर कार्रवाई की मांग की थी।अब दानापुर स्टेशन के बाहर सामने आई तस्वीरों ने एक बार फिर पुलिस व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जब मौके पर मौजूद कुछ नशेड़ियों से पूछा गया कि नशे का सामान कहां से मिलता है, तो उन्होंने दावा किया कि खगौल थाना और फुलवारीशरीफ थाना क्षेत्र में सूखे नशे का सामान खुलेआम उपलब्ध हो जाता है। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

गौरतलब है कि हाल ही में खगौल थाना पुलिस ने सूखे नशे के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए कई आरोपियों को गिरफ्तार किया था, लेकिन इसके बावजूद कई इलाकों में नशे का नेटवर्क सक्रिय होने की बात सामने आ रही है।नशेड़ियों ने पूछताछ में यह भी बताया कि वे बनारस, समस्तीपुर और अन्य जिलों से आकर दानापुर रेलवे स्टेशन के आसपास मजदूरी और छोटे-मोटे काम करते हैं।

धीरे-धीरे वे नशे की लत में फंस गए और अब खंडहर पड़े इलाके उनके ठिकाने बन गए हैं।स्थानीय लोगों ने रेलवे प्रशासन और पुलिस प्रशासन से मांग की है कि रेलवे कॉलोनियों और पुराने बैरकों में नियमित छापेमारी चलाकर ऐसे अड्डों को खत्म किया जाए, वरना आने वाले दिनों में यह समस्या और भयावह रूप ले सकती है।

यह सभी एनबीसी 24 के कमरे में कैद हुआ जहां नशेरियों ने बताया कि ₹50 में पुड़िया मिलता है हालांकि दानापुर स्टेशन पर आए दिन यात्रियों से मोबाइल चीन या समान चीन की लोकल थाना को मिलता है अब ऐसे में सुख नशे का जाल को कैसे खत्म किया जाए और आसपास के जितने भी खंडहर नुमा क्वार्टर है इस पर रेल प्रशासन और स्थानीय प्रशासन क्या करती है देखने की चीज है।